मंगलवार, 22 मई 2012

" वो तिरछे होंठ ........"


बहुत पहले टी.वी. पर 'बलसारा' कंपनी के विज्ञापन में डा.माया अलग एक विशेष प्रकार से 'ओफ्फ ओ ' बोलती थीं ,जिसमे उनके होंठ एक ओर थोडा सा ऊपर उठ जाया करते थे | वो विज्ञापन बहुत फेमस  हो चला था । बस तभी से पता नहीं क्यों मैं तिरछे होंठों का बहुत बड़ा फैन हो गया | (जबकि उस समय मै वयस्क भी नहीं था )।

हँसते हँसते जब किसी के होंठ ज़रा सा ऊपर एक कोने में उठ जाते हैं तब उसकी  हँसी में चार चाँद से लग जाते हैं |  बात करते करते जब वे रुकने की मुद्रा में आते हैं तब उनके होंठ ठहरते ठहरते एक ओर ऊपर जाकर रुक से जाते हैं |

इस प्रकार के फीचर वाले लोग अत्यंत कम ही होते हैं ।

ऐसा लगता है ,ईश्वर  जब खूबसूरत चेहरे बना लेते हैं ,फिर उन्हें जांचते समय उन पर टिक लगाते जाते हैं कि हाँ, ये चेहरे मानक अनुसार खूबसूरत हैं और इस जांच की प्रक्रिया में 'टिक' होंठ पर लग जाता है और वह एक ओर ऊपर उठ जाता है |



आज फिर देखी,
वो मुस्कान,
तिरछी सी,
लफ़्ज़ों के मेले,
से लगे थे,
उसके लबों पे,
हर तीसरे लफ्ज़ पर,
उसके लब थिरकते,
लरजते,
और यकायक,
उठ जाते,
एक ओर,
हाँ !
हँसने पर,
लब का कोना एक,
कुछ ज्यादा ही,
उठ जाता था,
एक ओर,
गोया,
ज्वार भाटा सा,
आता हो,
लबों पे उसके,
जी किया ,
ऊपर नीचे होते ,
लबों को,
छू लूँ,
हौले से,
अपनी उँगलियों से,
और रोक दूँ ,
धड़कने ,
उसके लफ़्ज़ों की,
मगर इतना होश कहाँ ,
डूब सा जो ,
गया था मै ,
लबों के,
ज्वार भाटे  में ।


( रचना का आधार महज कल्पना ,कृपया किसी को ठेस न पहुंचे )

26 टिप्‍पणियां:

  1. इतना बारीक चित्रण ......बहुत खूबसूरत!

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  2. आहा हा ..निर्मल तिरछी हंसी सा ही सुन्दर चित्रण.

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  3. चलो अब वयस्क हो गये और होठ पर टिक लगाने लगे। :)

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  4. भावों से नाजुक शब्‍द को बहुत ही सहजता से रचना में रच दिया आपने.........

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  5. बहुत हीं गहम अध्ययन किया है अपने...सुन्दर...

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  6. तिरछी नज़र के बारे में तो सुना है आपने तिरछे होंटों के बारे में बता कर न्य कीर्तिमान स्थापित किया है...:-) रोचक पोस्ट. बधाई

    नीरज

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  7. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


    इंडिया दर्पण
    की ओर से आभार।

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  8. सुन्दर भाव लिए..
    बहुत ही सुन्दर रचना...
    तिरछे होंठो का सुन्दर वर्णन...

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  9. खूबसूरती का सुन्दर सूक्ष्म अवलोकन बहुत अच्छा है। हमेशा की तरह लाजवाब....

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  10. बहुत खूबसूरत

    आखिर वयस्क हो ही गए

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  11. मुस्कान का तिरछा होना बहुत कुछ कहता है।

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  12. बहुत बहुत गहन अवलोकन आपकी बात में हमारी सहमती है इस तरह की मुस्कराहट कम ही मिलती है

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  13. सुन्दर प्रस्तुति....गहन विवेचन से परिपूर्ण

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  14. अरे वाह ....सुंदर वर्णन ....!!
    सुंदर रचना ...!!

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  15. अरे वाह ....सुंदर वर्णन ....!!
    सुंदर रचना ...!!

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  16. kisi ki ki agar koi baat achhi lagti hai to usme galat lagne jaisi koi baat nahi hai .
    hain-aapne jis tarah se vivechan kiya hai vo jaroor kabile tarrif hai----
    poonam

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